{"product_id":"आँचल-के-बिखरे-अल्फ़ाज-aanchal-ke-bikhre-alfaaz","title":"आँचल के बिखरे अल्फ़ाज (Aanchal Ke Bikhre Alfaaz)","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eकिताब के बारे में\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\"आँचल के बिखरे अल्फ़ाज़\" केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि दिल की उन भावनाओं की आवाज़ है जिन्हें शब्द मिलना आसान नहीं होता। रीतू अग्रवाल ने प्रेम, रिश्तों, दर्द, उम्मीद, माँ-पिता के स्नेह और जीवन के संघर्षों को सरल लेकिन गहराई से छू लेने वाले शब्दों में पिरोया है। हर कविता पाठक को अपने जीवन के किसी न किसी पल से जोड़ती है। यदि आप ऐसी कविताएँ पढ़ना पसंद करते हैं जो दिल को सुकून दें और भावनाओं को नए अर्थ दें, तो यह पुस्तक आपके लिए है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eलेखिका के बारे में\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमेरा नाम रीतू अग्रवाल है। मुझे हिंदी भाषा और साहित्य से विशेष लगाव है। कविता पढ़ना और अपने विचारों तथा भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। प्रकृति, जीवन, रिश्ते और समाज से जुड़ी बातें मुझे लिखने के लिए प्रेरित करती हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमेरी कविताओं में आशा, प्रेम, संवेदना, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की झलक मिलती है। मेरा उद्देश्य अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों के हृदय तक पहुँचना और उन्हें कुछ नया सोचने तथा महसूस करने के लिए प्रेरित करना है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमैं मानती हूँ कि शब्दों में लोगों के जीवन को छूने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की शक्ति होती है। मेरी यह कविता-पुस्तक मेरे मन के भावों की एक छोटी-सी अभिव्यक्ति है। आशा है कि मेरी रचनाएँ पाठकों को पसंद आएँगी और उनके हृदय में अपनी एक विशेष जगह बनाएँगी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"Classic Shelf","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50321981604077,"sku":null,"price":126.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0765\/3520\/2029\/files\/1shopifyfrontcover_5793d049-b78d-475c-9464-213b4257d307.jpg?v=1784803495","url":"https:\/\/classicshelf.in\/products\/%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%9c-aanchal-ke-bikhre-alfaaz","provider":"Classic Shelf","version":"1.0","type":"link"}