{"product_id":"ज़िंदगी-के-समोसे-हँसी-की-चटनी-zindagi-ke-samose-hansi-ki-chatni-paperback","title":"ज़िंदगी के समोसे, हँसी की चटनी | Zindagi Ke Samose, Hansi Ki Chatni (Paperback)","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAbout The Book\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘ज़िंदगी के समोसे, हँसी की चटनी’ हास्य, व्यंग्य और कहानीनुमा कविताओं का एक चटपटा संग्रह है, जो आपको गुदगुदाएगा, अपने अनुभवों की याद दिलाएगा और खुद पर भी मुस्कुराना सिखाएगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस पुस्तक की प्रस्तावना दो राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त कवियों, श्री विनीत ‘पंछी’ और डॉ. तुषार शाह, ने लिखी है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमुख्य रूप से हिंदी (देवनागरी) में रची गई यह पुस्तक Hinglish (रोमन लिपि) में भी प्रस्तुत है, ताकि हिंदी समझने वाले अधिक से अधिक पाठक हँसी और व्यंग्य से सजी इस महफ़िल का आनंद ले सकें।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eआइए, कुछ पल भागदौड़ भरी ज़िंदगी से विराम लें, अपनों को याद करें और ज़िंदगी के इन समोसों का स्वाद हँसी की चटनी के साथ लें!\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAbout the Author\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसंदीप शंकर पेशे से इंजीनियर हैं, लेकिन लिखने-पढ़ने और हँसी-मज़ाक के शौक ने उन्हें कविता की दुनिया तक पहुँचा दिया। रोज़मर्रा की ज़िंदगी की छोटी-बड़ी बातें, बचपन की यादें, स्कूल-कॉलेज के दिन, खाने-पीने के चटखारे और मज़ेदार किस्सों में छिपा हास्य-व्यंग्य उनकी कविताओं में जगह पा जाता है। उनका मानना है कि ज़िंदगी की भागदौड़ के बीच अपनों के साथ हँसने-मुस्कुराने के कुछ पल मिल जाएँ, तो सफ़र और भी खूबसूरत हो जाता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Classic Shelf","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":68025721094381,"sku":null,"price":296.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0765\/3520\/2029\/files\/1shopifyfrontcover_b885986b-ad24-4cce-adcf-8d71674b1f42.jpg?v=1793172543","url":"https:\/\/classicshelf.in\/products\/%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%81%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a5%80-zindagi-ke-samose-hansi-ki-chatni-paperback","provider":"Classic Shelf","version":"1.0","type":"link"}