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उत्सवे जिन्दगी पर उकेरी-हिंदी व अंग्रेजी की कविताएं (Utsve Jindagi par Ukeri-Hindi aur Angreji ki Kavitaen)
उत्सवे जिन्दगी पर उकेरी-हिंदी व अंग्रेजी की कविताएं (Utsve Jindagi par Ukeri-Hindi aur Angreji ki Kavitaen)
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किताब के बारे में
'उत्सवे जिंदगी पर उकेरी' एक कविता की किताब है। जैसे की टाइटल से समझ में आता है, कवि ने जिंदगी को एक जश्न या उत्सव माना है। उत्सव के तमाम रंग हमें अपनी जिंदगी में देखने में आते हैं जैसे दोस्ती, वात्सल्यता, गिरने के बाद पुनरुत्थान, मोहक नजारे, नदियां, स्त्री पुरुष का प्रेम, श्रृंगार भाव, मजदूरी, बिरहा, नैतिकता, हमारा अंतरमन, नारी का हुस्न, सुंदर स्त्री का सम्मोहन ,चकोर जैसा प्रेमी, प्यार में बांवरापन, तीज त्यौहार, फितरत, शिक्षक, बच्ची, गांव की याद, गुस्ताखीयां आदि। इन रंगों से जो गुलदस्ता तैयार होता है वह ही जिंदगी को गुलज़ार कर देता है। इन्हीं रंगों वाले गुलदस्ते को कविता की पंक्तियों के माध्यम से कवि ने इस काव्य रचना में उकेरा है।
इस काव्य रचना में अधिकतर हिंदी की कविताएं हैं और साथ-साथ कई चटपटे शेर। कुछ अंग्रेजी की कविताएं भी इस पुस्तक में प्रकाशित की गई हैं। कविताओं और शेर में कुछ जगह उर्दू का तड़का लगाया गया है। कवि ने बहुत ही सरल भाषा का अपनी कविताओं में और शेरों में उपयोग किया है ताकि सबको समझ में आए; कुछ कठिन शब्द या उर्दू के शब्द जो किताब में आए हैं उनका अर्थ संबंधित पन्ने में नीचे दे दिया गया है ताकि लेखन को समझा जा सके। शेर भी बहुत ही आसानी से समझने लायक हैं जैसे-
"इतने सस्ते में शराब न परोसा करो
बाजार में थोड़ा घुंघट काड़ लिया करो"
हाज़िर होते हैं तेरे रहम पर, अलविदा दुनिया को करके भगवान,
कुछ जवाब तू मांगेगा, मुझे भी छः प्रश्न करने हैं तुझसे।
कवि आशा करता है कि पाठकों को यह संरचना पसंद आएगी।
लेखक के बारे में
इस किताब के लेखक श्री सौरभ श्रीवास्तव हैं। कवि श्री सौरभ का जन्म भोपाल में 26 नवंबर 1962 को हुआ था। भोपाल के प्रसिद्ध कैंपियन स्कूल से इन्होंने वर्ष 1978 में हायर सेकेंडरी की परीक्षा उत्तीर्ण करी और और इसके उपरांत इन्होंने इंदौर के श्री गोविंदराम सेक्सेरिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में 5 वर्ष की इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करी और वर्ष 1983 में इंजीनियरिंग स्नातक बने। वर्ष 1984 में श्री सौरभ श्रीवास्तव ने मध्य प्रदेश विद्युत मंडल में सहायक अभियंता के रूप में अपनी नौकरी प्रारंभ करी। नौकरी में चलते वर्ष 1996 में कवि श्री सौरभ ने एम टेक (हाइड्रो पावर) की डिग्री भी हासिल करी। श्री सौरभ श्रीवास्तव ने अपने सेवा काल में मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में दो महत्वपूर्ण विभागों में चीफ इंजीनियर के पद पर कार्य किया और लगभग 40 साल से अधिक की नौकरी के बाद सेवानिवृत हुए।
कवि श्री सौरभ को कविता लिखने के अलावा, बागवानी, पेंटिंग, देश विदेश घूमना, पर्यटन व तकनीकी विषयों पर लेक्चर देना तथा आर्टिकल लिखना, क्रिकेट मैच देखना आदि शौक हैं। श्री सौरभ श्रीवास्तव की वर्ष 1988 में इलाहाबाद की कविता सिन्हा से शादी हुई। इनके दो पुत्र हैं जिनमें अंतरिक्ष, इंजीनियर है एवं क्षितिज, डॉक्टर है।
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