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किराये का शहर : जहाँ उम्मीदें सच से बड़ी हो जाती हैं (Kiraye Ka Shahar: Jaha Ummiden Sach se Badi ho Jati Hain)
किराये का शहर : जहाँ उम्मीदें सच से बड़ी हो जाती हैं (Kiraye Ka Shahar: Jaha Ummiden Sach se Badi ho Jati Hain)
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About The Book
हर शहर अपने भीतर हजारों कहानियाँ छुपाए रहता है। कुछ कहानियाँ सपनों की होती हैं, कुछ संघर्ष की और कुछ ऐसे रिश्तों की, जो जिंदगी बदलकर चले जाते हैं।
किराये का शहर वासु की ऐसी ही कहानी है—एक साधारण युवक की, जो परिवार की जिम्मेदारियों और अपने सपनों के बीच जिंदगी को संभालने की कोशिश करता है। एक छोटे शहर से निकलकर महानगर की भीड़ में अपनी जगह बनाने की उसकी यात्रा आसान नहीं है। अभाव हैं, जिम्मेदारियाँ हैं, छोटी-छोटी खुशियाँ हैं और एक ऐसा प्रेम भी है, जो धीरे-धीरे उसकी पूरी दुनिया का हिस्सा बन जाता है।
वासु के लिए प्रेम सिर्फ़ किसी का साथ नहीं, बल्कि एक भरोसा है। उसे लगता है कि जिंदगी चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, अगर अपना कोई साथ हो तो रास्ता आसान हो जाता है।
लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी सोच के मुताबिक नहीं चलती।
कुछ रिश्ते समय के साथ बदलते हैं। कुछ फैसले ऐसे होते हैं जिनका असर वर्षों तक रहता है। और कभी-कभी इंसान को अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने के लिए उसी जगह लौटना पड़ता है, जहाँ से वह सबसे ज्यादा टूटा था।
किराये का शहर सिर्फ़ प्रेम की कहानी नहीं है। यह उन लोगों की कहानी है जो अपने घर, अपने शहर और अपने पुराने जीवन को पीछे छोड़कर बेहतर भविष्य की तलाश में निकलते हैं।
यह कहानी पूछती है—
क्या जिसे हम अपना घर समझते हैं, वह सच में हमारा होता है?
और क्या कुछ रिश्ते खत्म होने के बाद भी हमारे भीतर अपना एक छोटा-सा कमरा बनाए रखते हैं?
किराये का शहर — प्रेम, भरोसे, संघर्ष और जिंदगी को फिर से जीने की कहानी।
About The Author
डॉ. के. कपिल एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व हैं, जो अपने चिकित्सीय और व्यावसायिक कार्यों के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों में गहरी रुचि रखते हैं। वे चिकित्सा और उद्यमिता के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं।
चिकित्सा जगत में उनका सफर काफी प्रेरणादायक रहा है, जिसके तहत उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया है। चिकित्सा के अलावा वे उद्यमिता, हर्बल उत्पादों के विकास और ब्रांडिंग के क्षेत्र में भी पूरी तरह सक्रिय हैं। पारंपरिक आयुर्वेदिक वेलनेस उत्पादों और आधुनिक ब्रांड निर्माण में उनकी विशेष रुचि रही है।
अपने व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच, डॉ. के. कपिल ने अपनी रचनात्मकता और जीवन के अनुभवों को शब्दों का रूप देकर लेखन के क्षेत्र में भी कदम रखा है। उनकी यही संवेदनशीलता और जीवन को करीब से देखने की कला उनकी लेखनी और उपन्यासों में स्पष्ट रूप से झलकती है।
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