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क्यों 90% स्टार्टअप्स कब्रिस्तान में: नया बिज़नेस क्यों डूबता है… डूबने से कैसे बचें
क्यों 90% स्टार्टअप्स कब्रिस्तान में: नया बिज़नेस क्यों डूबता है… डूबने से कैसे बचें
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किताब के बारे में
"क्यों 90% स्टार्टअप्स कब्रिस्तान में" उद्यमियों, स्टार्टअप संस्थापकों और MSME व्यवसायियों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। यह पुस्तक बताती है कि अधिकांश स्टार्टअप अच्छे आइडिया की कमी से नहीं, बल्कि कमजोर सिस्टम, वित्तीय अनुशासन की कमी, कैश फ्लो समस्याओं और गलत व्यावसायिक निर्णयों के कारण असफल होते हैं।
वास्तविक अनुभवों, शोध और केस स्टडीज़ पर आधारित यह पुस्तक सरल और प्रभावी रणनीतियाँ प्रस्तुत करती है, जिनकी सहायता से पाठक एक मजबूत, टिकाऊ और सफल व्यवसाय का निर्माण कर सकते हैं। यदि आप अपना पहला स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं या अपने व्यवसाय को नई ऊँचाइयों तक ले जाना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक सिद्ध होगी।
About The Author
देवकुमार प्रसाद गुप्ता एक अनुभवी कॉर्पोरेट लीडर, प्रबंधन विशेषज्ञ, शोधकर्ता और बिज़नेस मेंटर हैं। उन्हें व्यवसायिक रणनीति (Business Strategy), राजस्व वृद्धि (Revenue Growth), वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) तथा संगठनात्मक परिवर्तन (Organizational Transformation) के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मार्केटिंग और फाइनेंस में MBA किया है तथा वर्तमान में स्टार्टअप असफलताओं के मूल कारणों पर केंद्रित विषय में PhD कर रहे हैं।
अपने पेशेवर जीवन में उन्होंने बड़े कॉर्पोरेट संगठनों के साथ-साथ अनेक MSME संस्थानों के साथ कार्य किया है, जहाँ उन्होंने व्यवसायों की परिचालन दक्षता बढ़ाने, वित्तीय प्रदर्शन को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक विकास रणनीतियाँ विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 300 से अधिक असफल स्टार्टअप संस्थापकों के साथ किए गए उनके शोध और संवाद से यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया कि अधिकांश व्यवसाय अच्छे विचारों की कमी से नहीं, बल्कि व्यवस्थित प्रणालियों, वित्तीय अनुशासन और विस्तार योग्य परिचालन प्रक्रियाओं के अभाव में असफल होते हैं।
उद्यमियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से देवकुमार प्रसाद गुप्ता कॉर्पोरेट जगत की श्रेष्ठ प्रबंधन पद्धतियों और भारत में व्यवसाय संचालन की व्यावहारिक वास्तविकताओं के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करते हैं। अपनी लेखनी के माध्यम से वे जटिल प्रबंधन सिद्धांतों को सरल, व्यवहारिक और आसानी से लागू किए जा सकने वाले मार्गदर्शन में परिवर्तित करते हैं।
उनका उद्देश्य उद्यमियों को ऐसी मजबूत, प्रणाली-आधारित (System-Driven) संस्थाएँ बनाने में सहायता करना है, जो सामान्य व्यावसायिक चुनौतियों से बचते हुए दीर्घकालिक सफलता, स्थिरता और निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ सकें।
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