Classic Shelf
मैं हूँ कौन?: संघर्ष, साहस और समर्पण की कहानी (Main Hoon Kaun?: Sangharsh, Sahas aur Samarpan ki Kahani)
मैं हूँ कौन?: संघर्ष, साहस और समर्पण की कहानी (Main Hoon Kaun?: Sangharsh, Sahas aur Samarpan ki Kahani)
Couldn't load pickup availability
About The Book
हर घर की अपनी एक कहानी होती है। कुछ कहानियाँ मुस्कुराहटों और त्योहारों की रौनक में छिप जाती हैं, तो कुछ रिश्तों की खामोशी में। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर ऐसे शब्द, निर्णय और घाव होते हैं जो वर्षों तक अनकहे रह जाते हैं।
"मैं हूँ कौन?" केवल शुभम की कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत लोगों की कहानी है जिन्होंने अपने परिवार के लिए अपने सपनों, इच्छाओं और खुशियों का त्याग किया। जिन्होंने रिश्तों को निभाने में कभी कमी नहीं छोड़ी, लेकिन एक दिन यह महसूस किया कि प्रेम और सम्मान हमेशा साथ-साथ नहीं चलते।
शुभम ने अपने परिवार को ही अपना संसार माना। उसने अपनों की खुशियों को हमेशा अपनी इच्छाओं से ऊपर रखा। पर जब जीवन ने उसके सामने एक ऐसा सच रखा जिसने उसकी पहचान, उसके रिश्तों और उसके अस्तित्व पर प्रश्न खड़े कर दिए, तब उसने शोर नहीं मचाया, किसी पर आरोप नहीं लगाया। उसने केवल कुछ कागज़ अपने पिता के हाथों में रख दिए—और उसी क्षण वर्षों से खड़ी एक दुनिया बदल गई।
यह उपन्यास घटनाओं का मात्र क्रम नहीं, बल्कि भावनाओं, विश्वास, त्याग, आत्मसम्मान और रिश्तों की जटिलता का दस्तावेज़ है। इसके पात्र और संवाद शायद आपको अपने जीवन की झलक दिखाएँ, क्योंकि यह कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं, उन सभी की है जिन्होंने कभी अपने प्रेम, अपने परिवार और अपने आत्मसम्मान के बीच किसी एक को चुनने की मजबूरी महसूस की है।
आइए, इस भावनात्मक यात्रा का हिस्सा बनिए—क्योंकि कुछ कहानियाँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, वे दिल से जी जाती हैं।
About The Author
राहुल शर्मा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) में वरिष्ठ प्रबंधक (Senior Manager) के पद पर कार्यरत हैं और बैंकिंग एवं ऋण प्रबंधन के क्षेत्र में 12 से अधिक वर्षों का अनुभव रखते हैं। अपने व्यावसायिक जीवन में उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों, उद्यमियों और आम लोगों के संघर्ष, सपनों तथा जीवन की वास्तविकताओं को निकट से देखा है। यही अनुभव उनके लेखन की सबसे बड़ी प्रेरणा बने।
बचपन और युवावस्था से ही राहुल की रुचि हिन्दी साहित्य में रही है। वे नियमित रूप से जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद और हरिशंकर परसाई जैसे महान साहित्यकारों को पढ़ते रहे हैं। इन लेखकों की संवेदनशीलता, यथार्थवाद और मानवीय दृष्टिकोण ने उनके विचारों और लेखन शैली को गहराई से प्रभावित किया है।
लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, रिश्तों और मानवीय भावनाओं को समझने तथा पाठकों तक पहुँचाने का एक सार्थक प्रयास है। उनकी भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली है, जो पाठकों को कहानी के पात्रों से आत्मीय रूप से जोड़ती है।
"मैं हूँ कौन?" राहुल शर्मा का पहला उपन्यास है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि पहचान, परिवार, संघर्ष, प्रेम और आत्मसम्मान की खोज पर आधारित एक भावनात्मक यात्रा है। उनका विश्वास है कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है।
राहुल शर्मा भविष्य में भी ऐसे उपन्यास लिखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो यथार्थ, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को सशक्त रूप से पाठकों तक पहुँचाएँ।
Share
