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सर्प दंश
सर्प दंश
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About The Book
ये कहानी आर्यन की है, जिसका दोस्त अरविन्द, बात बात में शर्त की ही बात करता है, जिसे वह ऐन केन प्रकारेन जीत भी लेता है। इसी क्रम में वह शिमला में गेस्ट हाउस के केयरटेकर की बेटी तारा से झूठे इश्क के लिये भी शर्त लगा लेता है। जीत तो ये भी शर्त जाता है, पर असली माने में यहाँ उसकी हार हो जाती है। तभी कोविड महमारी का प्रकोप उस पहाड़ पर भी पड़ता है, जहाँ से अरविन्द डर कर निकल लेता है। केयरटेकर और उसकी बेटी तारा दोनों बिमारी से ग्रसित ही जाते हैं. आर्यन हौसला रखते हुए उनकी देख भाल करता है, पर तारा के पिता को नहीं बचा पाता है।
कोविड महामारी की पृष्ठभूमि में उत्पन्न ये एक प्रेम कथा है, जहाँ आर्यन और तारा का प्यार फलता फुलता है।
About The Author
इस उपन्यास के लेखक, गिरीश चौधरी, पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जो उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र, दरभंगा के निवासी हैं। लेखन का शौक इनके व्यावसायिक व्यस्तता के नीचे कहीं दब कर रह गया था। कोविड महामारी के दौर में जब सब अपने अपने घरों में बन्द थे, इन्हें इस महामारी के पृष्टभूमि में सर्प दंश की रचना सुरु करने का समय मिला, परन्तु महामारी ख़त्म होते होते ये कहानी आधी अधूरी रूप में लैपटॉप में ही बन्द हो कर रह गयी। बहुत दिनों बाद जब इनकी पत्नी नें इस ओर ध्यान आकर्षित किया तो इस रचना को अन्तिम रूप मिला। ये इनकी पहली रचना है। आशा है ये लोगों के दिलों को छू लेगा।
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