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अधमरा

अधमरा

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About The Book

हिन्दी उपन्यास ‘अधमरा’ मेरा पहला उपन्यास है, इस उपन्यास को पूरा करने मे मुझे लगभग 1.5 वर्ष लगे है। उपन्यास की कहानी एक गाँव के एक दुग्ध व्यपार संबंधी धनी किसान सीताराम और उनके परिवार के इर्द गिर्द है । कहानी में नायक कुनाल है जो सीताराम का पुत्र है कुनाल को क्रिकेट पसंद है लेकिन गाँव से पिता द्वारा जबर्जस्ती पढ़ाई के लिए काशी भेजा जाता है। वह काशी में जारा से मिलता है । दूसरा नायक अरुण है जो समाज के छोटी जाति का मजदूर है और उसकी जिंदगी को सीताराम की पुत्री शक्ति द्वारा एक आकार मिलता है। इस कहानी के माध्यम से मैंने अपने अनुसार प्रेम का दर्शन क्या होना चाहिए, इंसान के जीवन मे उसके सपने का क्या महत्व होता है और सपने अधूरे होने से , जीवन कैसे अधूरा सा लगता है। राजनीति कैसे लोगों के खून के साथ खेलती है। खोखले समाज का डर और समाज के द्वारा बनाए गए प्रतिष्ठा की परिभाषा पर जब कभी एक इंसान खरा उतरता है तो ये कैसे एक अहंकार का रूप ले लेता है। ये अहंकार मनुष्य को खोखला करता है । जीवन मे सरलता न होने से , कठिनाइयाँ और पैदा होती है। ये मैंने इस उपन्यास के माध्यम से बताया है। उपन्यास की कहानी में अरुण - शक्ति, और कुनाल – जारा, नायक – नायिका है। अंत में मेरा इस उपन्यास के माध्यम से पाठकों को कुछ सिखाने की कोशिश नहीं है, केवल आप उपन्यास पढिए और भाव महसूस करिए ,मैं केवल आनंद बांटने आया हूँ , मेरे उपन्यास का आनंद लीजिए ।

About The Author

दुनिया कहती है नाम से ही सबकुछ होता है, नाम उत्कृष्ट इन्सान को निकृष्ट बनाता है, और निकृष्ट इन्सान को उत्कृष्ट, लेकिन मेरे अनुसार एक इंसान स्वयं के नाम को उत्कृष्ट और निकृष्ट बनाता है। नाम के आगे जाति जुड़ जाती है, जाति भेद खड़ा करती है। मेरा जन्म मेरे नानी के घर हुआ। मेरा अधिकतर बचपन मेरे नानी के यहाँ गुजरा है। नानी के अनपढ़ सभ्यता के आगे मेरी पढ़ी लिखी सभ्यता फीकी है। उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला, प्रेम, विनम्र रहना और किसी की महानता का सम्मान करना, मैंने नानी से ही सीखा। बचपन मे दुनिया जीतने का सपना था लेकिन अब खुद को जीतना चाहता हूँ । नानी के यहाँ मेरा बचपन राजा की तरह बिता, उसके बाद मेरे जीवन मे भूचाल ही रहा मैंने 12वी बाद ,दिल्ली विश्वविद्यालय मे दाखिला लिया, कॉलेज के समय आर्थिक स्थिति की मांग थी, नौकरी की, कॉलेज के बीच मे ही सौभाग्य से मेरा चयन भारतीय नौसेना मे हुआ। ट्रेनिंग के समय दुर्भाग्यवश दुर्घटना के कारण, एक सिपाही का कर्तव्य अदा करने मे शरीर का असमर्थ हो जाने के कारण मैं नौसेना से सेवानिवृत्त हुआ । मैंने 1 वर्ष मे नौसेना से जो भी सीखा और पाया , उसके लिए भारतीय नौसेना का हमेसा आभारी रहूँगा, मैं आज भी खुद को देश का सिपाही मानता हूँ। मेरा खून का कतरा-कतरा इस देश को समर्पित है। वर्तमान मे मै भारत सरकार के अंतर्गत कनिष्ठ सचिवालय सहायक हूँ। अभी जीवन चल रहा है, जीवन के उतार चढ़ाव अभी बाकी है ।

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