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कौलाचार-सर्वस्वम्ः भाग 2 - कौलाचार-कर्मदीपिका: तन्त्र-आगम आधारित संपूर्ण सनातन कर्मकाण्ड विधि
कौलाचार-सर्वस्वम्ः भाग 2 - कौलाचार-कर्मदीपिका: तन्त्र-आगम आधारित संपूर्ण सनातन कर्मकाण्ड विधि
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किताब के बारे में
कौलाचार–सर्वस्वम्: भाग 2, कौलाचार–कर्मदीपिका तन्त्र और आगम पर आधारित सनातन कर्मकाण्ड की एक सुव्यवस्थित, प्रामाणिक तथा व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। यह ग्रन्थ पूजा, न्यास, ध्यान, आवाहन, उपचार, जप, होम, तर्पण, मार्जन, बलि, यन्त्राराधना, पुरश्चरण और विविध संस्कारों के आन्तरिक अर्थ एवं विधि को स्पष्ट करता है। इसमें कर्मकाण्ड को केवल बाह्य अनुष्ठान न मानकर देह, प्राण, मन्त्र, देवता और चेतना के समन्वित साधना-विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साधक, आचार्य, पुरोहित और जिज्ञासु पाठक इसके माध्यम से शास्त्रीय विधान, आवश्यक अनुशासन, शुद्धाचार, संकल्प तथा प्रयोग की क्रमबद्ध समझ प्राप्त कर सकते हैं। ग्रन्थ की विशेषता यह है कि इसमें परम्परागत विधानों को उनके दार्शनिक आधार, साधनात्मक प्रयोजन और समकालीन उपयोगिता सहित सहज, स्पष्ट, सुसंगत और क्रमबद्ध रूप में सविस्तार समझाया गया है। यह पुस्तक परम्परा और व्यवहार के बीच सेतु बनाते हुए कौलाचार की जीवित दृष्टि को सामने लाती है। इसका उद्देश्य अनुष्ठान को यांत्रिकता से मुक्त कर उसे भाव, बोध, शक्ति और साधना से पुनः जोड़ना है, ताकि प्रत्येक कर्म आत्मशुद्धि, देवसान्निध्य और शिवशक्ति-सामरस्य का मार्ग बन सके और साधक का सम्पूर्ण जीवन स्वयं देवपूजा में परिणत हो।
लेखक के बारे में
डॉ. सुमन कुमार दास, आध्यात्मिक नाम स्वामी सुमनानन्द नाथ, कौलाचार्य, साधक, शोधकर्ता, उद्यमी और बहुआयामी लेखक हैं। वे खजुराहो स्थित ललिता दिव्याश्रम के संस्थापक-पीठाधीश्वर तथा 41-दिवसीय मन्त्रयोग साधना के प्रवर्तक हैं। दशकों की साधना, गुरु-परम्परा, तन्त्रागम-अध्ययन और प्रत्यक्ष अनुष्ठान-अनुभव उनके लेखन का आधार हैं। उन्होंने सनातन धर्म, कौलाचार, तन्त्र, योग, कृषि, स्वास्थ्य और चेतना पर सत्तर से अधिक ग्रन्थ लिखे हैं। उनका लेखन शास्त्र और व्यवहार के बीच सेतु बनाता है। वे जो जीते हैं, वही लिखते हैं और जो लिखते हैं, उसे पूर्ण निष्ठा से साधना में उतारते हैं।
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