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Classic Shelf

चार अक्षर-नमन में आँखें नम (हार्डकवर)

चार अक्षर-नमन में आँखें नम (हार्डकवर)

Regular price Rs. 340.00
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किताब के बारे में

"चार अक्षर नमन में आँखें नम" केवल एक लंबी कविता नहीं, बल्कि भारत के वीर सैनिकों, अमर शहीदों और उनके परिवारों के अद्वितीय त्याग को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।
यह कृति उन सैनिकों के अटूट साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का चित्रण करती है, जो अपने व्यक्तिगत सुख, परिवार और जीवन से ऊपर राष्ट्र की सुरक्षा को स्थान देते हैं। कविता केवल रणभूमि के पराक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन परिवारों की मौन पीड़ा, संघर्ष, आत्मबल और गौरव को भी स्वर देती है, जो अपने प्रियजन के बलिदान के बाद जीवनभर स्मृतियों के सहारे आगे बढ़ते हैं।
देशभक्ति, संवेदना और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण यह रचना पाठकों को यह अनुभव कराती है कि शहादत केवल एक सैनिक का बलिदान नहीं, बल्कि पूरे परिवार का आजीवन समर्पण है। यह पुस्तक राष्ट्र के प्रति सम्मान, कर्तव्य और बलिदान की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करती है तथा प्रत्येक भारतीय के हृदय में अपने वीरों के प्रति श्रद्धा का दीप प्रज्वलित करती है।

लेखक के बारे में

कैप्टन मणींद्र नाथ झा भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी, प्रतिष्ठित सुरक्षा विशेषज्ञ एवं संवेदनशील हिन्दी कवि हैं। अनुशासन, निष्ठा और राष्ट्रसेवा उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ रही हैं। सैन्य सेवा के पश्चात उन्होंने सुरक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट सेवाएँ जारी रखीं और साहित्य के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें एक संवेदनशील रचनाकार के रूप में स्थापित करती है। उनकी कविताओं में राष्ट्रभक्ति, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक चेतना, प्रेम, करुणा और जीवन-मूल्यों का सशक्त समन्वय दिखाई देता है। एक सैनिक के दृढ़ संकल्प और एक कवि की कोमल संवेदना का अद्भुत संगम उनकी लेखनी की विशिष्ट पहचान है।
"चार अक्षर नमन में आँखें नम" के माध्यम से कैप्टन मणींद्र नाथ झा ने भारत के वीर सैनिकों, अमर शहीदों और उनके परिवारों के त्याग, साहस और गौरव को शब्दों में अमर करने का विनम्र प्रयास किया है।

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