Classic Shelf
Ek Mrityu, Anek Prashn: Bhai, tum fir aana (Paperback)
Ek Mrityu, Anek Prashn: Bhai, tum fir aana (Paperback)
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About The Book
एक मृत्यु, अनेक प्रश्न—सत्य की तलाश में।
क्या किसी अपने की मृत्यु केवल उसके चले जाने का नाम है, या वह हमारे भीतर एक ऐसी यात्रा की शुरुआत भी करती है, जो हमें स्वयं से और जीवन के सत्य से परिचित कराती है? अपने इकलौते भाई लविश को खोने के बाद लेखिका निकिता त्यागी भी ऐसे ही एक मोड़ पर खड़ी हैं, जहाँ प्रेम की गहराई के साथ असंख्य अनुत्तरित प्रश्न जन्म लेते हैं, वह क्यों चला गया? क्या कुछ बदला जा सकता था? और यदि जीवन अनिश्चित है, तो उसके वास्तविक अर्थ की तलाश कहाँ की जाए? इन प्रश्नों से शुरू होती है एक बहन की संवेदनशील, आत्मीय और आध्यात्मिक यात्रा। स्मृतियों, आँसुओं, पश्चाताप, क्रोध, मौन, ध्यान और ईश्वर की खोज के बीच लेखिका अपने दुःख को समझने और उसके साथ जीना सीखने का प्रयास करती हैं। यह पुस्तक दुःख से तुरंत बाहर निकल आने की सीख नहीं देती, बल्कि उस दुःख के बीच स्वयं को पहचानने का अवसर देती है। ‘भाई, तुम गए नहीं, प्रश्न छोड़ गए’ उस प्रेम की अभिव्यक्ति है, जिसे मृत्यु समाप्त नहीं कर पाती; उस विरह की कथा है, जो धीरे-धीरे आत्मबोध का मार्ग बनता है; और उस विश्वास की तलाश है, जो अंधकार के बीच भी जीवन की ओर लौटने का साहस देता है। क्योंकि कभी-कभी किसी अपने का जाना हमें ऐसे प्रश्नों के सामने खड़ा कर देता है, जिनके उत्तर बाहर नहीं, हमारे अपने भीतर छिपे होते हैं।
कुछ रिश्ते देह से परे भी जीवित रहते हैं। कुछ विदाइयाँ अंत नहीं, एक नई खोज की शुरुआत होती हैं।
About The Author
Nikita Tyagi holds a Bachelor’s degree in English Honours from the University of Delhi, a Master’s degree in English, and an LL.B. She is currently practising as a Criminal Advocate in the District Court. She has also gained work experience in the finance, legal, and industrial sectors, which has helped her understand people and society from different perspectives.
With this book, she makes her debut as a Hindi author, taking her first step into the world of Hindi literature with the hope of sharing her thoughts and connecting with readers through her words.
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