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Maa Kahin Jati Nahin… | माँ कहीं जाती नहीं…
Maa Kahin Jati Nahin… | माँ कहीं जाती नहीं…
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About The Book
""माँ का तत्व समा लेती हैं बेटियाँ अपने भीतर, रखती हैं अपनी माँ को अपने पास सर्वदा।""
जीवन के निरंतर प्रवाह में क्या एक स्त्री की पहचान केवल रिश्तों तक ही सीमित है? डॉ. भूमिका श्रीवास्तव का यह काव्य संग्रह 'माँ कहीं जाती नहीं...' इसी गहरे प्रश्न की पड़ताल करता है। यह पुस्तक केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि एक बेटी के हृदय की वह पुकार है जो अपनी माँ को खोने के बाद उन्हें अपनी यादों, आदतों और संस्कारों में पुनः जीवित पाती है।
संग्रह का प्रथम भाग जहाँ माँ के वात्सल्य और उनके त्याग को समर्पित है, वहीं दूसरा भाग 'अस्तित्व की तलाश' उन 'अदृश्य बेड़ियों' और 'लक्ष्मण रेखाओं' को चुनौती देता है जो सदियों से स्त्री के पैरों में बांधी गई हैं। यह संग्रह संस्कारों और आधुनिकता के बीच उस संतुलन की खोज है, जो हर स्त्री के भीतर कहीं न कहीं मौजूद है। तीसरे भाग में, लेखिका ने मुनष्य को वर्तमान का आईना दिखाने का प्रयास किया है।
पुस्तक के मुख्य आकर्षण :
वात्सल्य और संस्कार: माँ की स्मृतियों, उनकी सादगी और उनके द्वारा विरासत में दिए गए अनमोल जीवन मूल्यों का जीवंत चित्रण।
अस्तित्व की तलाश: आधुनिक युग में नारी की स्वतंत्रता, उसके आंतरिक संघर्ष, समाज के दोहरे मापदंडों और उसकी असीमित शक्ति का निर्भीक वर्णन।
जीवन दर्शन: आज की भागदौड़ भरी दुनिया में मानसिक शांति की तलाश, संतोष का महत्त्व और स्वयं के साथ कुछ पल बिताने का गहरा संदेश।
""माँ कहीं जाती नहीं..."" हर उस पाठक के लिए है जो अपनी माँ की झलक स्वयं में देखना चाहता है, हर उस स्त्री के लिए है जो स्वाभिमान की दिशा में एक नया कदम बढ़ाना चाहती है, और हर उस मनुष्य के लिए है, जो वर्तमान की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा है।
About The Author
डॉ. भूमिका श्रीवास्तव स्वयं को कवि की श्रेणी में नहीं, बल्कि एक भावुक बेटी के रूप में देखती हैं, जिन्होंने अपनी माँ को खोकर उन्हें शब्दों में खोजने का प्रयत्न किया है।
सादगी और सत्य का अनूठा संगम उनकी लेखनी की विशेषता है।
भूमिका जी, उत्तर प्रदेश से हैं और उनका वर्तमान निवास बेंगलुरु में है।
आप एक प्रशिक्षित कथक नृत्यांगना एवं थिएटर आर्टिस्ट भी है।
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